बहादुर चूहा और क्लास हैम्स्टर
छोटे कदम, बड़ी हिम्मत
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बेन हर सब्ज़ी को "ना!" कहता था-जब तक दादाजी ने उसके हाथ में एक नन्हा सा बीज नहीं रख दिया।
बेन ने अपनी हथेली में रखे बीज को घूर कर देखा। यह बहुत चिकना और हल्का लग रहा था। "क्या यह कोई रहस्य है?" उसने फुसफुसाते हुए पूछा। दादाजी ने सिर हिलाया और मुस्कुराए। "एक सीक्रेट मिशन।"
वे दादाजी के धूप वाले आँगन में गए। क्यारियाँ साफ-सुथरी पंक्तियों में बनी थीं। गर्म मिट्टी से बारिश और टोस्ट जैसी खुशबू आ रही थी। बाड़ के पास मधुमक्खियाँ भिनभिना रही थीं, जो अपने काम में व्यस्त और शांत थीं。
दादाजी ने मेज़ पर बीजों के चमकीले पैकेट फैला दिए। लाल, पीले और हरे रंग के चित्र चमक रहे थे। "अपनी टीम चुनो," दादाजी ने कहा। बेन मुस्कुराया। "टीम गार्डन पावर!"
उसने चेरी टमाटर के बीजों की ओर इशारा किया। "नन्हे फायरबॉल," उसने उनका नाम रखा। फिर उसने बीन्स उठाईं। "ये जंप रोप्स (कूदने वाली रस्सियाँ) हैं।" फिर उसने गाजर के बीज पकड़े। "ऑरेंज पाइरेट्स (नारंगी समुद्री डाकू)," उसने तय किया। दादाजी हँसे लेकिन उन्होंने कोई बहस नहीं की।
उन्होंने पेंसिल से साधारण पंक्तियाँ बनाईं। बेन ने तीर और छोटे-छोटे सूरज बनाए। उसने बक्सों के साथ एक गार्डन का नक्शा बनाया। उसने एक कंपास (दिशा सूचक यंत्र) जोड़ा और लिखा, "कदम मत रखना।"
बेन ने छोटी क्यारी को भर दिया। उसने मिट्टी को थपथपा कर समतल किया। यह गर्म और भुरभुरी थी। उसका चमकीला नीला वाटरिंग कैन पास ही रखा था।
"दो उंगली गहरा," दादाजी ने कहा। बेन ने सावधानी से छेद किए। प्लंक, प्लंक करके बीज अंदर गए। उसने उन्हें ऐसे ढक दिया जैसे खिलौनों को रजाई ओढ़ा रहा हो। फिर उसने तब तक पानी डाला जब तक मिट्टी ने पानी पी नहीं लिया।
"अब हम देखेंगे," दादाजी ने कहा। बेन ने अपनी नाक सिकोड़ी। "देखने में ज़्यादा मज़ा नहीं आता।" दादाजी ने आँख मारी। "आगे और मज़ा आएगा।"
दिन बीतते गए, एक हफ्ता हुआ, फिर दो। बेन हर कुछ सुबहों के बाद वापस आता था। वह अपने स्पेस स्नीकर्स पहनता था। वह अपनी डायरी और एक छोटा पैमाना (रूलर) साथ लाता था।
एक सुबह वह हैरान रह गया। एक हरी कली ऊपर निकल आई थी। "खजाना!" उसने अपने हाथ ऊपर उठाते हुए चिल्लाया। उसने एक छोटा सा रोबोट डांस किया। दादाजी ने सीढ़ियों से ताली बजाई।
बेन ने अपनी डायरी में उस कली का चित्र बनाया। उसने लिखा, "नन्हा फायरबॉल जाग गया है।" उसने एक बीन के पौधे को नापा। "दो इंच!" उसने खुशी से कहा।
दादाजी ने उसे प्यार से जंगली घास निकालना सिखाया। "नीचे से पकड़ो और धीरे से खींचो," उन्होंने कहा। बेन पास में उकड़ू बैठा और शांति से काम किया। घास धागों की तरह बाहर निकल आई। उसने उन्हें एक बाल्टी में रख दिया। मिट्टी उसकी उंगलियों से चिपक गई थी।
वह पौधों से धीरे-धीरे बात करता था। "सुप्रभात, जंप रोप्स," उसने कहा। "लंबे हो जाओ, ऑरेंज पाइरेट्स।" उसके वाटरिंग कैन से धीमी बारिश जैसी आवाज़ आती थी। छप, छप, छप।
हर दिन आसान नहीं था। एक दोपहर, एक खरगोश ने एक पत्ता कुतर लिया। बेन ने छोटे दाँतों के निशान देखे। उसका मुँह खुला का खुला रह गया। "मेरी टीम!" वह रो पड़ा।
वह घास पर इधर-उधर टहलने लगा। फिर उसकी आँखें चमक उठीं। "मैं एक दोस्ताना बाड़ बनाऊँगा।" उसे दादाजी की दराज़ में रिबन मिला। नीला, लाल और चमकीला सुनहरा। उसने उन्हें क्यारी के चारों ओर लकड़ियों से बाँध दिया। वे चमकीले झंडों की तरह फड़फड़ाने लगे। हवा के झोंके ने उन्हें ऐसे हिलाया जैसे वे 'हेलो' कह रहे हों। खरगोश ने अपनी नाक सिकोड़ी और उछल कर दूर चला गया।
वसंत ऋतु गर्मियों में बदल गई। धूप ने बेन की गर्दन और गालों को गर्म कर दिया। बीन की बेलों पर फूल खिल गए। सफेद तारे छोटी, हरी बीन्स में बदल गए। बेन ने अपनी उंगली के पोर से एक को छुआ। वह ठंडी और चिकनी लग रही थी।
चेरी टमाटर हल्के रंग से लाल रंग में बदल गए। वे काँच के कंचों की तरह कतार में लगे थे। बेन ने पास झुक कर उन्हें सूंघा। उनसे मीठी और ताज़ा खुशबू आ रही थी। गाजर के ऊपरी हिस्से ने एक झालरदार मुकुट बना लिया था। इसकी हरी पत्तियों ने उसकी त्वचा में गुदगुदी की।
वह पौधों को पानी देने के लिए सुबह जल्दी उठ जाता था। उसने अपना नक्शा चेक किया। उसने अपनी डायरी में स्टिकर लगाए। एक पन्ने पर लिखा था, "बीन डे!" दूसरे पन्ने पर टमाटर का चित्र था। उसने उसे बहुत चमकदार रंग दिया था।
आखिरकार, फसल काटने का समय आ गया। दादाजी ने उसे सिखाया कि कैसे घुमा कर तोड़ना है। "आराम से," दादाजी ने कहा। एक टमाटर टूट कर सीधे बेन की हथेली में आ गया। यह धूप से गर्म था। वह बिना किसी वजह के मुस्कुरा दिया।
उन्होंने गाजर के पत्तों को पकड़ा। बेन ने एक बार, दो बार खींचा। पॉप! मिट्टी से एक ऑरेंज पाइरेट (नारंगी गाजर) बाहर निकल आया। यह टेढ़ा-मेढ़ा था लेकिन एकदम परफेक्ट था।
उन्होंने सब्ज़ियों को एक चाँदी के कटोरे में धोया। पानी चमका और नाचने लगा। गाजर से छोटे-छोटे बुलबुले निकलने लगे। बेन ने इसे सूंघा और अपनी पलकें झपकाईं। "इसकी खुशबू मीठी है," उसने हैरानी से कहा।
दादाजी ने गाजर को गोल सिक्कों की तरह काटा। चाकू से क्रंच, क्रंच की आवाज़ आई। उन्होंने सिर्फ एक चुटकी नमक छिड़का। बेन ने सबसे छोटा टुकड़ा उठाया। उसका दिल गेंद की तरह धड़क रहा था।
उसने हिम्मत करके एक छोटा सा बाइट लिया। फिर एक बड़ा बाइट। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने चबाया और दादाजी को देखकर मुस्कुराया। "इसका स्वाद... एक कुरकुरे सूर्योदय जैसा है!"
उसने एक छोटा टमाटर चखा। वह रस के साथ फूट पड़ा। बेन हँसा और अपनी ठुड्डी पोंछी। "फायरबॉल की जीत," उसने कहा। दादाजी ने अपना चम्मच एक झंडे की तरह ऊपर उठाया।
उन्होंने एक रंग-बिरंगी स्नैक प्लेट बनाई। बीन्स, नारंगी सिक्के और लाल गोले। बेन के पड़ोसी दोस्त भी आ गए। माया, जमाल और ज़ो सीढ़ियों पर बैठ गए। उन्होंने कुरकुरे बाइट खाए और कहा, "मम्म!" "गार्डन पावर बाइट्स!" माया खुशी से चिल्लाई।
बेन ने उन्हें जल्दी से पूरी कहानी सुनाई। उस सीक्रेट बीज के बारे में। नक्शे, पैमाने और फड़फड़ाती बाड़ के बारे में。 बात करते समय उसके हाथ हवा में उड़ रहे थे। उसे खुद पर बहुत गर्व महसूस हो रहा था।
उसे हर सब्ज़ी पसंद नहीं आई। पालक देखकर अभी भी वह कंधे उचकाता था। लेकिन उसने थोड़ा सा चखा और सिर हिलाया। "शायद अगली बार," उसने कहा।
जब घर जाने का समय हुआ, दादाजी ने बीजों का एक पेपर बैग पैक किया। "खिड़की का मिशन," दादाजी ने कहा। बेन ने उन्हें कसकर गले लगाया। उनके बीच रखा बैग खड़खड़ाया।
कार में, बेन ने बैग को सीने से लगाए रखा। उसने कल्पना की कि नन्हीं कलियाँ जाग रही हैं। उसने हवा में उड़ते चमकीले झंडों की कल्पना की। वह उस एडवेंचर को याद कर मुस्कुराया जो उसने बोया था। और उस हिम्मत पर भी जो उसके साथ बढ़ रही थी।
लहरों के नीचे छोटे-छोटे कदम बड़ी हिम्मत बनाते हैं
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