नया स्कूल, नया दोस्त और रोमांच
लीना के कंपास ने दिखाया साहस का रास्ता
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सोमवार की सुबह, लीना ने पेंट शेल्फ के पीछे से झांकते हुए एक छोटे से चूहे को देखा।
सूरज की रोशनी से फर्श पर चमकीले चौकोर डिब्बे बन रहे थे। कमरे में क्रेयॉन जैसी महक आ रही थी। छोटे चूहे ने अपनी मूंछें फड़फड़ाईं। उसके बाल पेंसिल के लेड जैसे मुलायम और भूरे थे।
क्लास हैम्स्टर, निबल्स ने अपनी आवाज़ निकाली और अपने पहिये को जोर से घुमाया। पहिया एक छोटे ड्रम की तरह बजने लगा। चूहा डर के मारे सुन्न हो गया, उसने अपने पंजे समेट लिए। कुछ बच्चों ने चिल्लाकर उसकी ओर इशारा किया।
लीना ने अपना हाथ उठाया और एक उंगली अपने होंठों पर रखी। वह एक बादल की तरह धीरे-धीरे आगे बढ़ी। "सब ठीक है," उसने फुसफुसाते हुए कहा। "नमस्ते, नन्हे दोस्त।"
मिस पटेल शांत कदमों से पास आईं। उनके स्कार्फ पर छोटे-छोटे फूल बने थे। "सभी लोग, धीरे बोलें," उन्होंने कहा। "चलो अपने मेहमान को थोड़ी जगह दें।"
लीना पेंट शेल्फ के पास घुटनों के बल बैठ गई। उसके घुटने ठंडे फर्श को छू रहे थे। "मैं लीना हूँ," उसने प्यार से कहा। "मुझे लगता है कि तुम्हारा नाम टीको है।"
चूहे के कान हिले। वह बिल्कुल शांत रहा। निबल्स ने फिर से आवाज़ की और दो बार पहिया पटका। टीको डरकर पीछे हटा और पेंट की बोतल के पीछे छिप गया।
लीना ने मिस पटेल की ओर देखा। "क्या मैं उसे सुरक्षित महसूस कराने में मदद कर सकती हूँ?" उसने पूछा। "हम निबल्स के बारे में भी सीख सकते हैं।"
मिस पटेल मुस्कुराईं। "हाँ लीना, तुम कर सकती हो। एक ऐसी योजना बनाओ जिसका हम पालन कर सकें।"
लीना क्लास कैलेंडर के पास गई। उसने पाँच डंडों वाली एक छोटी सी सीढ़ी बनाई। उसके ऊपर उसने लिखा, "टीको के लिए बहादुरी के कदम।" उसने हर दिन के लिए स्टार स्टिकर लगाए।
उसने शेल्फ के पास तीन स्टिकी नोट्स रखे। हर एक पर उसने एक चेहरा बनाया। एक की आँखें बड़ी थीं: डरा हुआ। एक की भौंह उठी हुई थी: जिज्ञासु। एक पर छोटी सी मुस्कान थी: गर्वित।
"टीको अपनी नाक से इशारा कर सकता है," लीना ने क्लास को बताया। "आज हम दूर से ही निबल्स के बारे में सीखेंगे।"
पहले दिन, लीना पढ़ने वाले कालीन पर बैठ गई। उसने एक टिश्यू बॉक्स को एक तरफ से लिटा कर रख दिया। टिश्यू पेपर धीरे से चरमराया। टीको उस डिब्बे के मुहाने से ऐसे झांक रहा था जैसे किसी जहाज में कोई शर्मीला समुद्री डाकू हो।
निबल्स हल्की-हल्की आवाज़ के साथ बीज चबा रहा था। उसके पंजे तेज़ और साफ़ थे। लीना ने फुसफुसाकर कहा, "वह सूरजमुखी के बीज खा रहा है। उसके चबाने की आवाज़ सुनो।" टीको ने डरे हुए चेहरे को छुआ, फिर जिज्ञासु चेहरे को।
दूसरे दिन, लीना ने टिश्यू बॉक्स को एक कदम और पास रख दिया। उसने टीको को धातु की पानी की बोतल दिखाई। "निबल्स ऐसे पानी पीता है," उसने कहा। उसने बोतल की टिप को थपथपाया। टप, टप। "चार तक गिनते हुए साँस लो, चार तक छोड़ो," उसने साँस लेते हुए कहा। "इस तरह।" उसने चार उंगलियां उठाईं और धीरे से गिना। टीको की साँसें भी वैसी ही चलने लगीं। उसकी मूंछें शांत हो गईं।
तीसरे दिन, निबल्स अपने पहिये पर भागा। धप-धप, चीं-चीं। पहिया एक चीं-चीं वाला गाना गाने लगा। टीको उछला और छिप गया, फिर बाहर झांका। लीना ने फुसफुसाते हुए कहा, "जब वह खुश होता है, तो वह ऐसे ही आवाज़ करता है। उसे भागना बहुत पसंद है। चलो, हम फिर से साँस गिनते हैं।"
पूरी क्लास ने पिंजरे के पास बीजों का एक छोटा सा रास्ता बनाया। यह एक बिंदीदार सड़क की तरह लग रहा था। टीको ने कदम-दर-कदम हर बिंदु को सूँघा। उसने जिज्ञासु चेहरे को थपथपाया और अपने डिब्बे में थोड़ा तन कर बैठ गया।
चौथे दिन, लीना ने उस टिश्यू बॉक्स वाले किले को पिंजरे के बिल्कुल बगल में खिसका दिया। पिंजरे की छड़ों से फर्श पर साफ परछाइयां बन रही थीं। निबल्स ने अपने पंजों को छड़ों से दबाया और अपनी नाक फड़फड़ाई। टीको की पूंछ से एक छोटा सा प्रश्नवाचक चिन्ह बन गया।
पांचवें दिन, कमरे में बहुत रोशनी थी। धूल के कण धूप में नाच रहे थे। निबल्स ने छड़ों के बीच से एक बीज बाहर धकेला। वह एक बटन की तरह अटक गया। टीको ने पलकें झपकाईं, फिर अपना हाथ बढ़ाया। उसके पंजे पंखों की तरह हल्के थे। उसने वह बीज लिया और कुतरने लगा।
पूरी क्लास खुशी से उछल पड़ी और धीरे-धीरे ताली बजाने लगी। मिस पटेल का चेहरा खुशी से चमक उठा। लीना के कंधे रिलैक्स हो गए और वह ज़ोर से मुस्कुराई। "छोटे बहादुरी के कदम बड़ी हिम्मत बनाते हैं," उसने टीको से फुसफुसाते हुए कहा।
अगले हफ्ते, खिड़की के पास एक खट की आवाज़ हुई। पानी की बोतल टेढ़ी लटकी हुई थी। कोई बूंद नहीं गिर रही थी। निबल्स तेज़ी से आवाज़ निकालने लगा और इधर-उधर घूमने लगा। उसकी मूंछें छोटी झाड़ू की तरह फड़फड़ा रही थीं।
टीको चौंक गया और तेज़ी से अपने डिब्बे में घुस गया। उसका दिल बारिश की तरह धड़कने लगा। उसने एक साँस के लिए अपनी आँखें बंद कीं, फिर दूसरी के लिए। "चार तक साँस अंदर, चार तक बाहर," लीना ने एक कंबल जैसी कोमल आवाज़ में उसका मार्गदर्शन किया।
टीको ने बाहर झांका। निबल्स ने बोतल पर पंजा मारा और तीन बार जल्दी-जल्दी धप-धप की आवाज़ की। वे तेज़ लग रहे थे, लेकिन उसकी आँखें चमकीली थीं। उसकी नाक हिल रही थी, वह गुस्से में नहीं, बस परेशान था।
"उसे मदद की ज़रूरत है," लीना ने कहा। उसने मोटे गुलाबी इरेज़र का एक मीनार बनाया। एक, दो, तीन। उसने मीनार को पिंजरे के पास खिसका दिया।
टीको इरेज़र पर चढ़ गया। उसकी उंगलियां पकड़ बनाने के लिए फैल गईं। वह रुका और लीना की गिनती के साथ साँस लेने लगा। चार अंदर। चार बाहर।
वह छड़ों तक पहुँचा और अपने छोटे पंजों को फैलाया। बोतल की टिप पर टप, टप। कुछ नहीं हुआ। उसने फिर कोशिश की। टप-टप-टप।
टप! पानी की एक चांदी जैसी बूंद गिरी। फिर एक और। निबल्स ने अपना मुँह टिप से लगा लिया। घूंट, घूंट। उसने एक छोटी छलांग लगाई, फिर एक और। धप-धप, जैसे खुशी के ढोल बज रहे हों।
टीको के कान खड़े हो गए। उसने लीना की तरफ पलकें झपकाईं। उसने गर्वित चेहरे वाले नोट को धीरे से थपथपाया।
निबल्स अपने पिछले पैरों पर खड़ा हुआ और एक बीज पकड़ा। उसने उसे टीको की ओर धकेला। उनकी नाकें लगभग छू गईं, मूंछें नरम झाड़ू की तरह एक-दूसरे को पार कर रही थीं। टीको ने बीज ले लिया और शांत होकर पास ही बैठ गया।
पूरी क्लास ने एक साथ राहत की साँस ली। यह पत्तों के बीच से बहती हवा जैसी आवाज़ थी। मिस पटेल ने अपने स्कार्फ के कोने से अपनी आँखें पोंछीं। उन्होंने लीना को बिना आवाज़ किए कहा, "टीम वर्क।"
पूरा हफ्ता, टीको पिंजरे के पास आता रहा। वह शांति से चलता था, भागता नहीं था। निबल्स छोटी छलांग लगाता था, ज़ोर से नहीं धमकता था। कभी-कभी वे छड़ों के बीच से एक साथ चबाते थे, छोटे सितारों की तरह टुकड़े गिरते थे।
शुक्रवार को, लीना ने "बहादुरी के कदम" चार्ट पर आखिरी स्टार स्टिकर लगा दिया। सीढ़ी भर चुकी थी। वह खिड़की के पास खड़ी होकर दोनों छोटे दोस्तों को देखने लगी। धूप से उसके हाथ गर्म हो रहे थे।
उसने तीन स्टिकी नोट्स कालीन पर रख दिए। टीको ने जिज्ञासु वाले को छुआ, फिर गर्वित वाले को, और डरे हुए वाले को छोड़ दिया। वह बीज के छिलके को टिश्यू बॉक्स वाले किले में ले गया, जो अब एक आरामदायक घर बन गया था।
निबल्स ने अपना पहिया एक बार घुमाया और रुक कर सुनने लगा। टीको ने धीरे से नमस्ते कहने के लिए अपनी मूंछें फड़फड़ाईं। उनकी हरकतों में तालमेल था, सौम्य और पक्का।
लीना इतनी ज़ोर से मुस्कुराई कि उसके गाल दर्द करने लगे। उसने अपनी एक उंगली होंठों पर रखी और फिर अपने दिल की ओर इशारा किया। टीको समझ गया। वह सीधा होकर, चमकीली आँखों के साथ बहादुरी से बैठ गया, जबकि निबल्स ने दो छोटी छलांग लगाईं जो 'धन्यवाद' जैसी लग रही थीं।
लहरों के नीचे छोटे-छोटे कदम बड़ी हिम्मत बनाते हैं
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