बारिश के दिन का इंडोर एडवेंचर कोर्स
खेल के मैदान को अंदर लाना
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पिल्ला पेपर एकदम ठिठक गई-उसकी पसंदीदा हड्डी कहाँ गई?
निया पटेल बरामदे की सीढ़ियों पर खड़ी थी। उसके हाथ में एक गेंद थी। घास पर हल्की गर्म धूप फैली थी। हवा से ताज़े कटे पुदीने जैसी खुशबू आ रही थी। पेपर की पूंछ हिली, फिर नीचे गिर गई। उसके छोटे भूरे कान हिले और फिर शांत हो गए।
"क्या मेरे साथ खेलना है?" निया ने पूछा।
पेपर ने हल्की आवाज़ निकाली और बरामदे की चटाई पर पंजा मारा। उसने आँगन को देखा, फिर निया को। उसने एक छोटी सी छींक मारी और बैठ गई।
"ओह," निया ने प्यार से कहा। "तुम्हारी सीटी वाली हड्डी खो गई है।"
पेपर ने धीरे से एक बार भौंका। उसने निया के जूते को अपनी नाक से छुआ। उसकी नाक काम पर लग गई, बाएँ और दाएँ सूँघते हुए।
निया ने गेंद को अपनी जेब में रख लिया। "ठीक है, पार्टनर," उसने कहा। "हम इसे ढूंढ लेंगे। हम एक योजना बनाएंगे।"
निया ने अपनी उंगलियां उठाईं। "पहला कदम: वापस उसी रास्ते पर जाना।"
वे उसी रास्ते पर चले जहाँ से पेपर आज सुबह गई थी। बरामदे से, फूलों की क्यारी तक, फिर गेट तक। निया ने हर जगह का नाम ज़ोर से बोला।
"बरामदा। बगीचा। गेट।"
पेपर सूँघते हुए पीछे-पीछे आई। सीढ़ियों पर उसके नाखूनों की खट-खट आवाज़ आ रही थी। उसकी पूंछ धीरे-धीरे और असमंजस में हिल रही थी।
"दूसरा कदम: लैंडमार्क (निशान)," निया ने कहा। "चलो गिनते हैं कि हम क्या-क्या देखते हैं।"
चलते हुए उसने इशारा किया। "बाड़ के पास तीन लंबे सूरजमुखी। एक बड़ी ओक (बलूत) का पेड़ जिसकी डाली नीची है। पाइप के पास रखी लाल बाल्टी।"
पेपर बाल्टी के पास रुकी और अंदर झाँका। वहाँ सिर्फ पानी छलक रहा था। उसने अपनी ही नाक पर फुफकार मारी।
निया मुस्कुराई। "अच्छी जाँच की। अब पत्तों के झंडे।"
उन्होंने गिरे हुए चमकीले और सूखे पत्ते उठाए। निया ने हर पत्ते को मिट्टी में एक छोटे झंडे की तरह गाड़ दिया। "झंडे का मतलब है 'हमने यहाँ चेक कर लिया है,' ठीक है?"
पेपर ने सिर झुकाकर देखा। उसने अपनी नाक से एक झंडे को छुआ। वह हिला पर वहीं टिका रहा।
"तीसरा कदम: एक नक्शा बनाना," निया ने कहा।
वह बरामदे की सीढ़ी पर बैठ गई और एक छोटा नोटपैड निकाला। उसने आँगन के लिए एक चौकोर डिब्बा बनाया। उसने झाड़ियों के लिए छोटे गोले बनाए। उसने ओक के पेड़ के लिए एक तारा बनाया।
पेपर इतने करीब आ गई कि उसकी मूंछों से कागज़ पर गुदगुदी होने लगी। निया खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"हेल्पर की नई ट्रिक," निया ने कहा। "चीजों को याद रखने के लिए एक कविता।"
उसने गाया, "सोचो और समझो, एक, दो, दो!"
पेपर के कान खड़े हो गए। निया ने नक्शे पर अपनी कोशिशों के नंबर लिखे। "पहली कोशिश: बरामदा। दूसरी कोशिश: बगीचा। दो-दो की कोशिश: गेट," उसने मुस्कुराते हुए मज़ाक किया।
पेपर ने खुशी से हाँफने की आवाज़ निकाली, जैसे वह हँस रही हो।
"चौथा कदम: एक ग्रिड (जाल)," निया ने कहा। उसने तीन लंबी लाइनें खींचीं। "बायाँ। बीच का। दायाँ। हम एक बार में एक हिस्से की तलाशी लेंगे।"
उन्होंने सबसे पहले बाईं ओर चेक किया। पेपर ने डेंडेलियन के फूल के पास खोदा और एक पुरानी लकड़ी निकाल लाई। उसने अपनी पूंछ ज़ोर से हिलाई और उसे निया के पैरों के पास गिरा दिया।
निया ने पेपर की पीठ थपथपाई। "अच्छी चीज़ ढूंढी, लेकिन यह हड्डी नहीं है।" उसने एक लंबी और गहरी साँस ली। "चलो एक गहरी साँस लेते हैं।"
पेपर ने भी एक बड़ी सी साँस लेकर निया की नकल की। उसका शरीर शांत हो गया। उसकी पूंछ स्थिर हो गई।
"पाँचवाँ कदम: सूंघने का टेस्ट," निया ने कहा। "अपनी सबसे अच्छी नाक का इस्तेमाल करो।"
पेपर बाड़ के पास गई और सूंघने लगी। वह रुकी, बैठ गई और अपना सिर झुकाया। उसकी नाक बिल्कुल नीचे, एक ढीले बोर्ड के पास टिक गई।
निया ने बाड़ वाली जगह पर पत्तों का झंडा लगा दिया। उसने अपनी लिस्ट में उस पर सही का निशान लगाया। "वापस जाना, निशान, नक्शा, ग्रिड, सूंघने का टेस्ट," उसने हर शब्द को थपथपाते हुए पढ़ा। "हम बहुत अच्छा कर रहे हैं।"
इसके बाद उन्होंने बीच के हिस्से में तलाशी ली। निया के घुटनों के नीचे की मिट्टी गर्म लग रही थी। हवा से सूरजमुखी हिल रहे थे। मधुमक्खियाँ छोटी मशीनों की तरह भिनभिना रही थीं। पेपर ने मिट्टी को सूंघा, फिर असमंजस में निया की ओर पलकें झपकाईं।
"हम लगभग पहुँच गए हैं," निया ने कहा। "चलो समझदारी से देखते हैं।"
निया ने अपने नोटपैड के नक्शे को ध्यान से देखा। चौकोर आँगन। तारे वाला ओक का पेड़। गोल झाड़ियाँ। उनके लगाए हुए छोटे झंडे। उसने नक्शे को अपनी जांघ पर रखा और आँखें सिकोड़ीं।
पत्तों के तीन झंडे मिलकर एक आकार बना रहे थे। एक गेट के पास। एक बाड़ के पास। एक लाल बाल्टी के पास। एक साथ, वे एक तीर की तरह इशारा कर रहे थे।
"पेपर," निया ने उत्साह से फुसफुसाते हुए कहा। "देखो। एक त्रिकोण!" उसने हवा में अपनी उंगली से वह आकार बनाया। इसका इशारा ओक के पेड़ की निचली डाली की ओर था।
पेपर के कान खड़े हो गए। उसने ओक के पेड़ को देखा। चीज़ें गाड़ने के बाद वह उसकी पसंदीदा सोने की जगह थी।
वे जल्दी से पेड़ के पास गए। वहाँ घास पर ठंडी छाँव थी। जड़ों से एक मीठी, मिट्टी की खुशबू आ रही थी।
निया ने घुटने टेककर पत्तों को हटाया। उसने जड़ों के पास एक छोटा, दिल के आकार का पत्थर देखा। "यह तुम्हारे सीक्रेट (गुप्त) निशान जैसा लगता है, पेप!" उसने कहा।
पेपर पत्थर पर खड़ी हुई, फिर एक तरफ उछल गई। उसने दो बार खोदा-खुरच, खुरच। मिट्टी उड़ी। उसने अपनी नाक अंदर डाली।
चूँ!
पेपर अपने मुँह में नीली हड्डी लिए बाहर निकली। वह खुशी से भौंकी, उसकी पूंछ तेज़ी से हिल रही थी।
"तुमने कर दिखाया!" निया ने खुशी से कहा। उसने ताली बजाई और हँसी।
पेपर गोल-गोल घूमी, फिर एक इनाम की तरह हड्डी को निया के घुटने पर रख दिया।
निया ने बरामदे की शेल्फ से एक छोटा सा डिब्बा निकाला। उसने उस पर पहले ही एक लेबल चिपका दिया था। उस पर लिखा था, "घर"। उसने शब्द के बगल में एक छोटी सी हड्डी भी बनाई थी।
"नई टिप," निया ने कहा। "जब हमारा काम खत्म हो जाता है, तो खजाने यहाँ जाते हैं।"
पेपर उछलती हुई आई और उसने सीटी वाली हड्डी को डिब्बे में डाल दिया। वह तन कर बैठ गई, उसकी छाती गर्व से चौड़ी थी।
निया ने डिब्बे के पास पत्तों का एक और झंडा लगाया और अपने नक्शे पर एक छोटा सा चौकोर डिब्बा जोड़ दिया। उसने अपनी लिस्ट के आखिरी बॉक्स पर सही का निशान लगाया। "सारे कदम पूरे हुए," उसने कागज़ थपथपाते हुए कहा।
सूरज थोड़ा नीचे खिसक गया, गर्म और प्यारा। बाड़ से एक रॉबिन पक्षी चहचहाने लगा। पेपर ने निया की जेब से गेंद को नाक से छुआ।
"क्या अब खेलने के लिए तैयार हो?" निया ने पूछा।
पेपर ने इतनी ज़ोर से हाँ में पूंछ हिलाई कि वह लगभग गिर ही गई।
निया ने लॉन के पार धीरे से गेंद फेंकी। पेपर दौड़ी, उसके पंजे घास पर ढोल की तरह बज रहे थे। उसने उसे पकड़ा, पलटी, और खुशी व शांति से वापस आ गई।
उन्होंने प्यार से गेंद वाला खेल खेला। हर बार गेंद फेंकने के बीच में, निया अपने साफ़-सुथरे नक्शे को देखती। पत्तों के झंडे छोटे हरे हाथों की तरह फड़फड़ा रहे थे, मानो कह रहे हों, तुमने कर दिखाया।
पेपर बरामदे के पास सिकुड़ कर बैठ गई, उसकी हड्डी 'घर' वाले डिब्बे में सुरक्षित थी। निया ने उसके कानों के पीछे खुजलाया। दिन बहुत उज्ज्वल और आसान लग रहा था, जैसे योजना ने मौज-मस्ती के लिए जगह बना दी हो।