लैला और अनलेबल्ड एडवेंचर
एक सिटी क्वेस्ट जहाँ हर हिस्से की अहमियत है
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जूनी वहीं जम गई जब माँ का चमकीला नीला मग फिसला, फर्श से टकराया, और-टन!
रसोईघर में गर्म टोस्ट और संतरे के जैम की महक आ रही थी। सूरज की रोशनी टाइल्स पर एक चमकीली धारी बना रही थी। जूनी ने अपने भरवां खिलौनों के लिए छोटे-छोटे कप लगाए थे। कैप्टन बिस्किट, उसका पांडा, नैपकिन का बो लगाकर मुख्य कुर्सी पर बैठा था।
जूनी मग को घूरती रही। उसके किनारे पर एक छोटा सा टुकड़ा टूट गया था, जो किसी टूटे हुए दाँत जैसा लग रहा था। एक पतली सी दरार नीचे की तरफ एक छोटा सा रास्ता बना रही थी। उसका दिल एक फुदकते खरगोश की तरह धड़क रहा था।
उसने मग उठाया और ठंडे हैंडल को महसूस किया। "ओह नहीं," उसने कैप्टन बिस्किट से फुसफुसाकर कहा। "मेरी कोहनी लग गई। यह माँ का पसंदीदा मग है।"
जूनी ने कल्पना की कि टूटा हुआ हिस्सा एक बहुत बड़ी खाई में बदल रहा है। उसने सोचा कि दरार एक तेज़ नदी की तरह बढ़ती ही जा रही है। उसके पेट में गुदगुदी होने लगी, ठीक वैसी ही जैसी स्पेलिंग टेस्ट से पहले होती थी।
"मुझे एक योजना चाहिए," उसने पांडा से कहा। "एक बहादुर योजना।"
जूनी ने एक क्रेयॉन और एक बड़ा कागज़ उठाया। उसने ऊबड़-खाबड़ लाइनों और सितारों के निशानों वाला एक नक्शा बनाया। उसने ध्यान से लिखा: सच्चाई की खोज। उसने गले में केप की तरह एक पेपर टॉवल बाँध लिया। जब वह चलती तो वह सरसराता।
रसोई की कुर्सियाँ 'कुर्सियों के पहाड़' बन गईं। हॉल का गलीचा 'डगमगाता पुल' बन गया। लिविंग रूम का दरवाज़ा 'आखिरी दरवाज़ा' था, जहाँ माँ बैठकर पढ़ रही थीं। पिछवाड़ा 'फुसफुसाता जंगल' था। जूनी ने टूटा हुआ मग अपनी बांह के नीचे दबाया और नक्शा मेज पर रख दिया।
"पहली चुनौती," उसने धीरे से कहा। "बिना पीछे देखे डगमगाते पुल को पार करना।"
उसने गलीचे पर एक पैर रखा। गलीचा उसके पैर की उंगलियों के नीचे नरम और खुरदुरा महसूस हुआ। जूनी ने अपनी बाहें हवाई जहाज के पंखों की तरह फैलाईं। उसने अपने घुटने मोड़े और कदम बढ़ाया। एक कदम। दो कदम। केप उसके पैरों को छू रहा था।
उसके मन ने पीछे मुड़कर देखने की कोशिश की। वह अपने नक्शे पर अगले सितारे को देखती रही। "छोटे कदम, बड़ी हिम्मत," उसने धीरे से साँस लेते हुए कहा। धीरे-धीरे और स्थिर रूप से, वह अंत तक पहुँच गई और अपने हाथों में एक छोटी सी खुशी मनाई।
जूनी ने अपने नक्शे पर एक गोला बनाया। "हिम्मत का पहला पत्थर," उसने कैप्टन बिस्किट से कहा। उसने अपनी जेब में एक चिकना, चमकीला पत्थर रखने का नाटक किया।
दूसरे सितारे ने 'सुरंग वाली गुफा' को दिखाया: रसोई की मेज। जूनी घुटनों के बल झुकी और उस धुंधली जगह में झाँका। खाने के टुकड़े छोटी नावों जैसे लग रहे थे। वहीं, एक कुर्सी के पैर के पास, नीला टूटा हुआ छोटा टुकड़ा पड़ा था।
वह पेट के बल खिसकी। टाइल उसकी शर्ट पर ठंडी महसूस हुई। मेज़पोश ने एक छायादार तम्बू बना दिया था। "मैंने तुम्हें देख लिया," उसने फुसफुसाकर कहा। "मैं तुम्हें ले लूँगी।" उसने अपनी उंगलियाँ फैलाईं और उस टुकड़े को अपनी ओर खिसकाया। जब वह उसके नाखून से टकराया तो एक शांत क्लिक की आवाज़ आई।
वह पीछे हटी और बैठ गई। वह टुकड़ा उसकी हथेली पर एक छोटे से चाँद की तरह बैठा था। "हिम्मत का दूसरा पत्थर," उसने मुस्कुराते हुए कहा। उसने उस टुकड़े को एक सैंडविच बैग में रख दिया, ताकि वह खो न जाए।
जूनी ने नक्शा देखा। अगला सितारा एक बाड़ की तस्वीर के पास था। "मिस्टर पटेल से टेप लेना है," उसने पढ़ा। उसने घूँट निगला। मदद माँगने से उसके गाल गर्म हो गए।
उसने धूप वाले पिछवाड़े में कदम रखा। घास उसके टखनों में गुदगुदी कर रही थी। पत्तियाँ एक-दूसरे से रहस्य फुसफुसा रही थीं। कैप्टन बिस्किट उसकी बांह के सहारे बैठा था। जूनी बाड़ की ओर बढ़ी और एक गाँठ वाले छेद से झाँका।
मिस्टर पटेल अपने टमाटर के पौधों को पानी दे रहे थे। उन्होंने एक ढीली टोपी पहन रखी थी। उनका पानी देने वाला कैन बूँदों से चमक रहा था।
"अह, नमस्ते, मिस्टर पटेल?" जूनी ने पुकारा। उसकी आवाज़ छोटी लेकिन स्थिर महसूस हुई। "क्या आपके पास थोड़ा टेप है, प्लीज़? मेरा नक्शा थोड़ा फट गया है।" उसने एक छोटे से फटे हुए कागज़ को ऊपर उठाया।
मिस्टर पटेल मुस्कुराए और हाथ हिलाया। "ज़रूर, जूनी। अभी आया।" वह एक पारदर्शी टेप और एक कोमल मुस्कान के साथ बाड़ पर आए। "लगता है यह कोई महत्वपूर्ण यात्रा है।"
"हाँ, है," जूनी ने कहा। उसका चेहरा शांत हो गया। "धन्यवाद।" उसने ध्यान से उंगलियों से फटे हुए हिस्से पर टेप लगाया। टेप ने एक नरम 'श्श्श' की आवाज़ की। "हिम्मत का तीसरा पत्थर," उसने नक्शे को फिर से अपनी बांह के नीचे दबाते हुए फुसफुसाया।
उसने घर की ओर वापस देखा। 'आखिरी दरवाज़ा' इंतज़ार कर रहा था।
जूनी लिविंग रूम के दरवाज़े पर खड़ी थी। माँ सोफे पर अपनी किताब और घुटनों पर एक कंबल के साथ बैठी थीं। कमरे में साफ साबुन और दालचीनी वाली चाय की महक आ रही थी।
जूनी को फिर से पेट में गुदगुदी महसूस हुई, जैसे छोटे पंख फड़फड़ा रहे हों। उसने अपनी हथेली अपनी जेब पर दबाई, जहाँ उसके काल्पनिक हिम्मत के पत्थर रखे थे। उसने मग और उस छोटे टुकड़े को बैग में पकड़ रखा था।
"माँ?" उसकी आवाज़ लड़खड़ाई, फिर स्थिर हो गई। "मुझे आपसे कुछ कहना है।"
माँ ने अपनी किताब नीचे रखी और सोफे पर थपथपाया। "आओ बैठो, जूनी।" उनकी आँखें नर्म थीं, जैसे गर्म ब्रेड।
जूनी ऊपर चढ़ गई। उसका केप चरमराया। उसने एक साँस ली। "मैं एक टी-पार्टी की तैयारी कर रही थी। मुझसे आपका नीला मग टकरा गया। वह टूट गया, और उसमें एक छोटी सी दरार आ गई है। मुझे टूटा हुआ टुकड़ा मिल गया है। मुझे माफ कर दीजिए।" उसने मग और बैग माँ की गोद में रख दिया। उसके हाथ थोड़े काँपे, फिर स्थिर हो गए।
माँ ने मग को देखा, फिर जूनी को। वह उसके सामने घुटनों के बल बैठीं और उसे धीरे से गले लगा लिया। जूनी ने माँ के दिल की स्थिर धड़कन महसूस की।
"मुझे बताने के लिए धन्यवाद," माँ ने कहा। उन्होंने मग घुमाया और इशारा किया। चमक में एक धुंधली, पुरानी रेखा दिख रही थी। "यह देखो? मैंने इस मग को एक बार पहले भी ठीक किया था।"
जूनी ने पलकें झपकाईं। "आपने किया था?"
माँ ने सिर हिलाया। "यह मेरे लिए इसलिए खास है क्योंकि हम इसे ऐसी आरामदायक सुबहों में इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नहीं कि यह बिल्कुल सही है।" उन्होंने जूनी के माथे से एक लट हटाई। "चलो एक सुरक्षित योजना बनाते हैं। हम इस मग को अब फूलों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। और हम चाय के लिए एक ज़्यादा मज़बूत कप चुनेंगे।"
जूनी का सीना हल्का महसूस हुआ, जैसे कोई खिड़की खुल गई हो। "क्या हम इसमें डेज़ी के फूल रख सकते हैं?"
"डेज़ी बहुत प्यारी लगेंगी," माँ ने कहा।
जूनी मुस्कुराई। उसने अपना केप खोला और उसे कैप्टन बिस्किट के कंधों पर लपेट दिया। "मिशन पूरा हुआ," उसने उससे कहा।
बाद में, उन्होंने नीले मग को पानी और आँगन से लाए सफेद डेज़ी के फूलों से भर दिया। सूरज की रोशनी पंखुड़ियों से छनकर मेज पर छोटे-छोटे सितारे बिखेर रही थी। माँ ने एक मज़बूत हरे कप में चाय बनाई। जूनी ने गर्म कप को दोनों हाथों से पकड़ा।
उसने अपने नक्शे को देखा और एक आखिरी गोला बनाया। "हिम्मत का चौथा पत्थर," उसने फुसफुसाया। उसे अब और लाइनें बनाने की ज़रूरत नहीं थी। वह पहले से ही रास्ता जानती थी।
माँ ने नक्शे पर थपथपाया। "मुझे अपनी 'सच्चाई की खोज' के बारे में बताओ," उन्होंने कहा।
जूनी ने पूरा रोमांच सुनाया-कुर्सियों के पहाड़, डगमगाता पुल, सुरंग वाली गुफा, और टेप वाले दयालु पड़ोसी। माँ सिर हिलाते हुए सुनती रहीं, उनकी मुस्कान सहज और उज्ज्वल थी।
डेज़ी के फूल नीले मग में तैर रहे थे। घर सुरक्षित और धूप से भरा महसूस हो रहा था। जूनी ने चाय की एक चुस्की ली। उसका स्वाद गर्मजोशी वाली हिम्मत और मीठे भरोसे जैसा था।
एक त्योहार, मिली हुई एक डायरी, और सूर्योदय का एक फैसला
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