लैला और अनलेबल्ड एडवेंचर
एक सिटी क्वेस्ट जहाँ हर हिस्से की अहमियत है
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माया ने अपना ब्रश डुबोया और एक ठंडी साँस ली। उसकी तस्वीर बिल्कुल भी अवा जैसी नहीं लग रही थी।
पूरी सुबह, उस खुशमिजाज क्लासरूम में बच्चे पेंटिंग कर रहे थे। अवा के कागज़ पर करीने से बने हरे पेड़ और बिल्कुल सही नीले रंग का आसमान चमक रहा था। हर पत्ती एक নিখুঁত छोटे अंडाकार की तरह थी। और माया की पेंटिंग? उसमें नारंगी रंग के घुमाव, एक गुलाबी पेड़, और सूरज जैसे पीले धब्बे थे जो गर्मजोशी से गले लगाने जैसे फैल रहे थे। रंग पूरे पन्ने पर उछल-कूद और नाच रहे थे। उसे लगा कि यह मजेदार दिख रहा है, लेकिन अब... उसने अवा की पेंटिंग पर नज़र डाली और उसके कंधे झुक गए।
अवा ने एक प्यारी सी मुस्कान दी। 'माया, मुझे तुम्हारे रंग बहुत पसंद आए!' लेकिन माया ने बस अपने होंठ भींच लिए। उसका दिल कस गया। 'मेरी वाली तो गंदी है।'
स्कूल के बाद, माया की माँ उसे बगीचे के गेट पर मिलीं। 'आज पेंटिंग कैसी रही?' माया अपने जूतों को घूरने लगी। 'ठीक थी।'
घर पर, किचन की मेज पर कलाकारी का सामान लगा हुआ था। सूरज की रोशनी अंदर आ रही थी, माया के गालों को गुदगुदा रही थी। उसने बैंगनी और हरे रंग को मिलाया जैसा उसे हमेशा से पसंद था। लेकिन उसका ब्रश बड़े-बड़े, घुंघराले आकार बना रहा था जिन्हें वह रोक ही नहीं पा रही थी। उसने एक पेड़ के लिए सीधी रेखा खींचने की कोशिश की, लेकिन - सर्र! - वह एक जंगली लहर में बदल गई। उसकी आँखों में आँसू लगभग भर ही आए थे।
माया अपनी कुर्सी से खिसक गई। वह हाथ में कोको का छोटा सा मग लिए सोफे पर दुबक कर बैठ गई।
उस शाम, माँ को एक विचार आया। 'चलो एक आर्ट गैलरी बनाते हैं!' माया की आँखें बड़ी हो गईं। माँ ने लिविंग रूम की दीवार पर तस्वीरें टेप से चिपका दीं। वहाँ माया के नारंगी घुमाव थे और अवा के करीने से बने पेड़ भी। जैक की टेढ़ी-मेढ़ी चॉक की लकीरें और प्रिया की फूलों वाली उंगलियों की छाप भी थी। एक पत्ती की कुरकुरी छाप भी चमक रही थी।
माँ ने हर कलाकृति की ओर इशारा किया। 'इसे देखकर तुम्हें कैसा महसूस होता है?'
माया ने अवा के पेड़ों को ध्यान से देखा। 'शांति। पेड़ बहुत अच्छे बने हैं।'
'और तुम्हारी वाली?'
माया ने अपने गुलाबी पेड़ और सूरज जैसे पीले धब्बों को देखा। उसे याद आया कि कैसे ब्रश के रेशे उसकी उंगली को गुदगुदा रहे थे। 'उम्... इसे देखकर लगता है जैसे मेरे चेहरे पर धूप पड़ रही हो। मेरा नाचने का मन कर रहा है!'
माँ मुस्कुराईं। 'मेरा भी! और इन टेढ़ी-मेढ़ी चॉक की लकीरों के बारे में क्या ख्याल है?'
माया खिलखिला उठी। 'ये तो ऐसे लग रहे हैं जैसे कोई हिलते-डुलते कीड़े की सवारी कर रहा हो।'
वे 'गैलरी' में घूमने लगे। माया ने फिर से अपनी कला को देखा। घुमाव जंगली थे, हाँ, लेकिन वे चमकीले, मज़ेदार और खुशियों से भरे भी थे।
माँ ने उसे एक नया, नुकीला पेंटब्रश दिया। 'इसे आज़माना चाहोगी?'
माया ने उसे नीले रंग में डुबोया। उसने एक छोटी सी सीधी रेखा खींची, फिर एक खुशमिजाज लहर। और फिर एक घुमाव। जल्द ही, पूरा कागज़ नाचने लगा - थोड़ा सा करीने से, थोड़ा सा जंगली, बिल्कुल उसकी तरह।
शनिवार को, माया पार्क में अवा से मिली। उन्होंने घास पर कागज़ फैला लिए। माया ने अवा की तरह एक छोटा हरा पेड़ बनाने की कोशिश की, लेकिन उसके चंचल हाथ ने उसे घुंघराला बना दिया। अवा हँसी और उसने एक इंद्रधनुष बना दिया।
दोनों एक-दूसरे की पेंटिंग को झाँक कर देख रही थीं। 'इसमें तो बहुत मज़ा आ रहा है!' अवा मुस्कुराई। 'चलो मिलकर एक बहुत बड़ी तस्वीर बनाते हैं।'
उन्होंने बारी-बारी से काम किया - अवा करीने से लकीरें खींचती, और माया बीच-बीच में गहरे घुमाव बना देती। छोटे-छोटे पेड़ों के चारों ओर घुमावदार लकीरें घूम रही थीं। उनकी कला को देखकर आने-जाने वाले लोग रुककर मुस्कुराने लगे। जल्द ही, हर कोई शामिल होना चाहता था। छोटी-छोटी उंगलियों ने रंगीन बिंदियाँ बनाईं। किसी ने चॉक से चाँदी के तारे बना दिए।
माया के गाल गर्म महसूस हो रहे थे, लेकिन धूप से नहीं। उसकी पेंटिंग अलग थी - पर वह लोगों को खुश कर रही थी। उसने देखा कि चाहे घुमावदार लकीरें हों या सीधी, हर तस्वीर कुछ खास जोड़ती है।
उस रात, माया ने उनकी बनाई बड़ी सी पेंटिंग अपने बिस्तर के ऊपर लटका दी। जैसे ही वह नींद में जा रही थी, उसने कल्पना की कि रंग घूम रहे हैं और हँसी हवा में तैर रही है, और उसका दिल एक इंद्रधनुषी सूरज की तरह भरा हुआ है। उसका ब्रश अभी भी घुमावदार था, अभी भी चमकीला - ठीक वैसा ही जैसा उसे पसंद था।
एक त्योहार, मिली हुई एक डायरी, और सूर्योदय का एक फैसला
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