लैला और अनलेबल्ड एडवेंचर
एक सिटी क्वेस्ट जहाँ हर हिस्से की अहमियत है
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मलिक ने अपनी समुद्री डाकू वाली टोपी खींची और अपने भाई के दरवाज़े से झाँका, यह उम्मीद करते हुए कि आज वह दिन होगा।
उसके एक हाथ में फोम की तलवार थी। उसका भरवां तोता उसके कंधे पर बैठा था। दालान से पैनकेक और साबुन की महक आ रही थी। सूरज की रोशनी कालीन पर छोटे-छोटे चौकोर बना रही थी।
जमाल का दरवाज़ा आधा खुला था। मलिक ने नोटबुक के कागज़ और पेंसिलें देखीं। जमाल गणित की वर्कशीट पर झुका हुआ था, और हिसाब हल करते हुए उसके होंठ हिल रहे थे।
"चलो चलें!" मलिक अपनी तलवार लहराते हुए अंदर घुस गया। "समुद्री डाकू के द्वीप पर, अभी!"
जमाल ने ऊपर देखा। उसने अपनी पेंसिल एक सवाल पर दबाई। "अभी नहीं, छोटे। मुझे यह खत्म करना है।" उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन उसकी आँखें पन्ने पर ही टिकी रहीं।
मलिक के कंधे झुक गए। उसकी समुद्री डाकू वाली टोपी एक भौंह पर खिसक आई। उसने अपने पैर घसीटे और अपने सीने में एक छोटा सा तूफान उठता हुआ महसूस किया। फोम की तलवार लटक गई।
वह लगभग पैर पटकने ही वाला था। वह लगभग चिल्लाने ही वाला था। इसके बजाय, उसे कल की अपनी टीचर की आवाज़ अपने मन में सुनाई दी। इंतज़ार करके देखो। सही समय का इंतज़ार करो। मलिक ने एक धीमी साँस अंदर और बाहर ली, जैसे कोई गुब्बारा फुला रहा हो।
वह कमरे से पीछे हट गया और धीरे से दरवाज़ा बंद कर दिया। क्लिक की आवाज़ बहुत धीमी थी।
मलिक किचन की मेज़ पर गया। उसने अपने सबसे चमकीले क्रेयॉन और एक मोटा मार्कर उठाया। उसने एक कागज़ के ऊपर एक बड़ा सुनहरा सितारा बनाया। उसने बहुत ध्यान से लिखा, "एडवेंचर टिकट।" उसने एक छोटा समुद्री डाकू का जहाज़, एक रॉकेट, और एक जंगल की बेल भी बनाई। उसने जहाज़ को लाल रंग से रंगा। उसने रॉकेट में नीली लपटें बनाईं। मार्कर कागज़ पर चीं-चीं कर रहा था।
उसका भरवां तोता एक बटन वाली आँख से देख रहा था। मलिक ने फुसफुसाया, "हम कैप्टन टाइम का इंतज़ार कर रहे हैं।" तोते ने कुछ नहीं कहा, लेकिन वह उसकी बाँह में ठीक से झुक गया।
मलिक लिविंग रूम में बैठ गया जहाँ से वह दालान देख सकता था। उसने ब्लॉक जमाए। उसने उनसे एक ऊँचा लाइटहाउस बनाया। हर बार जब वह दौड़कर दोबारा पूछना चाहता, तो वह एक गहरी, बहादुर साँस लेता। उसने पाँच तक गिना। ब्लॉक क्लिक, क्लिक, क्लिक कर रहे थे।
जमाल ने एक पन्ना पूरा किया। मलिक ने कागज़ को फाड़ने की धीमी आवाज़ सुनी। जमाल कागज़ लेकर मलिक के पास से गुज़रा और उसके सिर पर हल्के से थपथपाया। "हे," उसने कहा। फिर वह कूड़ेदान की ओर गया और थैला बाहर निकाला। प्लास्टिक की खड़खड़ाहट हुई।
मलिक ने टिकट ऊपर उठाया, लेकिन वह चिल्लाया नहीं। वह देखता रहा और इंतज़ार करता रहा। सामने का दरवाज़ा खुला और बंद हुआ। ठंडी हवा उसके गालों को छू गई।
ड्राइववे में, छोटा बास्केटबॉल हूप नीले आसमान के नीचे खड़ा था। जमाल गेंद को उछाल रहा था। थप, थप, थप। मलिक ने अपनी नाक जाली वाले दरवाज़े से सटा दी। नेट से सर्र, सर्र की आवाज़ आई।
उसके मोज़ों में उसकी उंगलियाँ हिल रही थीं। वह एक पटाखे की तरह बाहर फूटना चाहता था। उसने एक और गुब्बारे वाली साँस ली और अपने तोते को गले लगा लिया।
जब कूड़ा बाहर रख दिया गया, तो जमाल ने पाँच बार और शॉट मारे। सर्र, सर्र, टन, सर्र, सर्र। फिर उसने अपनी आस्तीन से अपना माथा पोंछा और अंदर आ गया। घर शांत महसूस हो रहा था, जैसे किसी ने रोकी हुई साँस छोड़ी हो।
मलिक खड़ा हो गया। उसने अपनी शर्ट ठीक की। वह जमाल के दरवाज़े पर गया और धीरे से खटखटाया।
"हाँ?" जमाल ने कहा।
मलिक ने अपना सिर अंदर किया। उसने अपनी आवाज़ धीमी रखी। "जमाल, जब आपका काम हो जाए, तो क्या हम प्लीज़ खेल सकते हैं? मैंने एक टिकट बनाया है।" उसने दोनों हाथों से कागज़ पकड़ा हुआ था।
जमाल ने पलकें झपकाईं। फिर वह धीरे-धीरे, चौड़ी मुस्कान के साथ मुस्कुराया। "यह तुमने बनाया है?"
मलिक ने सिर हिलाया। "मैंने इंतज़ार किया। मैं और इंतज़ार कर सकता हूँ।"
जमाल ने अपनी कुर्सी पीछे धकेली। "कोई ज़रूरत नहीं। मैं तुम्हारे लिए ही तैयारी कर रहा था।" वह खड़ा हुआ और अपनी जेब थपथपाई। "चलो। मेरे पास एक सरप्राइज़ है।"
वे गैरेज की ओर चले। दरवाज़ा खड़खड़ाहट के साथ ऊपर उठा। सूरज की रोशनी बक्सों के पहाड़ पर फैल गई। किनारों पर टेप चाँदी की तरह चमक रहा था। एक हुक से रस्सी के गोले लटके हुए थे। एक टूलबॉक्स पर पुराने नक्शों का ढेर पड़ा था।
मलिक का मुँह खुला रह गया। उसकी समुद्री डाकू वाली टोपी लगभग गिर ही गई थी। "आपने यह सब बचाया था?"
"मैं इकट्ठा कर रहा था," जमाल ने कहा। "मैं अपना काम खत्म करना चाहता था, ताकि मैं तुम्हें पूरा कैप्टन टाइम दे सकूँ।"
दोनों ने मिलकर एक लंबा बक्सा आँगन में खींचा। उसमें से गत्ते और धूल की महक आ रही थी। उन्होंने टेप लगाकर उसे एक जहाज़ बनाया। मलिक ने एक टेढ़ा-मेढ़ा खोपड़ी वाला झंडा बनाया। जमाल ने सुरक्षित कैंची से एक खिड़की काटी।
उन्होंने बरामदे की रेलिंग से रेत के ढेर तक एक रस्सी बांधी। मलिक ने उसे अपने हाथों से परखा। वह खुरदरी, लेकिन मज़बूत महसूस हुई। जमाल ने दरवाज़े से घास तक द्वीपों की तरह पत्थर रखे।
"खज़ाना यहाँ है," मलिक ने शेड पर एक चमकीला स्टिकर चिपकाते हुए कहा। उसने अपना एडवेंचर टिकट दरवाज़े पर, ठीक नॉब के नीचे चिपका दिया। "टिकट, प्लीज़," उसने अपना सीना फुलाते हुए कहा।
जमाल ने सलाम किया। "कैप्टन टाइम हाज़िर है।"
मलिक इतना मुस्कुराया कि उसके गाल दुखने लगे। "पहला सुराग," उसने कहा। वह धीमी समुद्री डाकू वाली आवाज़ में बोला। "ढूँढ़ो जहाँ नारंगी गेंद हवा को चूमती है।"
जमाल ने हूप को देखा और हँस पड़ा। वह बाहर भागा, गेंद को ड्रिबल किया, और एक शॉट मारा। सर्र! मलिक ने एक खिलौने वाला ड्रम बजाया। "सही जवाब!"
अगला सुराग: "शार्क वाली घास को छुए बिना रस्सी का पुल पार करो।" मलिक ने अपनी बाँहें फैलाकर संतुलन बनाया। उसके मोज़े लगभग फिसल गए, लेकिन वह कूदा और रस्सी पकड़ ली। जमाल उसके पीछे-पीछे आया, अपने पंजों पर मज़ेदार तरीके से कदम रखते हुए। वे दोनों लड़खड़ाते और हँसते हुए पहुँच गए।
उन्होंने गत्ते के जहाज़ को चलाया। मलिक एक कागज़ की प्लेट वाले पहिये से जहाज़ चला रहा था। जमाल अपने मुँह से समुद्र की आवाज़ें निकाल रहा था। वूऊऊऊश! छपाक!
आखिरी सुराग उन्हें शेड तक ले गया। मलिक एक प्लास्टिक के चम्मच से मिट्टी खोदने लगा। उसका तोता एक गार्ड की तरह देख रहा था। उसे चट्टानों के एक छोटे ढेर के नीचे एक टिन का लंच बॉक्स मिला।
अंदर स्टिकर, दो फ्रूट च्यू और एक नोट था जिस पर लिखा था, "मलिक के लिए, फर्स्ट मेट जमाल की तरफ से।"
मलिक ने जमाल को कमर से गले लगा लिया। इस बार उसकी समुद्री डाकू वाली टोपी सच में गिर गई। "अब तक का सबसे अच्छा कैप्टन टाइम," उसने जमाल की शर्ट में मुँह छिपाकर कहा।
जमाल ने मलिक के बालों में हाथ फेरा। "हम यह घर के काम और होमवर्क के बाद कर सकते हैं," उसने कहा। "हर शनिवार। ठीक है?"
मलिक ने तेज़ी से सिर हिलाया। "ठीक है। मैं सही समय पर पूछूँगा। और मैं नए टिकट बनाऊँगा।"
उन्होंने साथ मिलकर सफाई की, टेप उतारे और बक्से जमाए। सूरज नीचे ढल रहा था, उनकी पीठ पर गर्म और नरम महसूस हो रहा था। घर में सुकून था। मलिक के अंदर का तूफान बहुत पहले ही शांत हो चुका था।
उस रात उसने एडवेंचर टिकट को अपनी ड्रेसर पर रख दिया। तोता उसके सहारे झुका हुआ था, सुनहरे सितारे की रखवाली कर रहा था। मलिक ने जम्हाई ली और छत को देखकर मुस्कुराया।
इंतज़ार करना, उसने सोचा, खाली नहीं था। यह गुलेल को पीछे खींचने जैसा था। जब आप सही समय पर छोड़ते हैं, तो आप उड़ सकते हैं।
एक त्योहार, मिली हुई एक डायरी, और सूर्योदय का एक फैसला
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