बेला बनी का धीमा सा गीत
जब धीमी आवाज़ में हो जादू
Ages 6-8 📄 32 pages 📚 Grade 1-2 0
About This Book
बेला बनी को धीमी आवाज़ें पसंद हैं — हल्की गुनगुनाहट, नरम कविताएँ, और वह गीत जो उसने सुनहरे मेपल पत्तों के बारे में अपनी मखमली नोटबुक में सहेज रखा है। तो जब बत्तख आंटी टैलेंट शो की घोषणा करती हैं, बेला अपनी घास की जगह पर ही रुकी रहती है, उसके लंबे कान झुके हुए। "मेरी आवाज़ बहुत धीमी है," वह फुसफुसाती है। फिर सैमी गिलहरी कागज़ के तारों का एक गट्ठर लिए उछलता हुआ आता है और एक सीधा-सा सवाल पूछता है — क्या वह साथ में कोशिश करना चाहेगी? बड़े बलूत के पेड़ के नीचे दोनों धीमी साँसें और नन्हे सुर लेने का अभ्यास करते हैं, और बेला सोचने लगती है कि क्या एक फुसफुसाहट भी किसी ज़ोरदार आवाज़ जितनी चमक सकती है — अगर वह उसे स्टेज तक ले जा पाए।
Themes
gentle couragefriendshipself-acceptance
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