मिलो और जादुई हवाई जहाज़
दोस्ती मेले की एक कहानी
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मिलो अपनी क्लास में सबसे अच्छे कागज़ के हवाई जहाज़ बनाता था। सुमन मैम की क्लास में कोई भी उसके जैसा जहाज़ नहीं बना पाता था। हर रोज़ खेलने के समय, वह एकदम सीधे और तेज़ उड़ने वाले जहाज़ बनाकर खेल के मैदान में उड़ाता। जब उसका जहाज़ सबसे दूर तक जाता तो सब बच्चे तालियाँ बजाते और मिलो को यह बहुत अच्छा लगता। वह जहाज़ बनाने की अपनी खास तरकीब किसी को नहीं बताता था, उसने यह राज़ अपने पेंसिल बॉक्स में छिपा रखा था। उसके दोस्त—जो सब अलग-अलग दिखते थे और हमेशा हँसते-खेलते रहते थे—बार-बार कोशिश करते, पर उनके जहाज़ लड़खड़ाकर नीचे गिर जाते, जबकि मिलो का जहाज़ सर्र से आसमान में उड़ता चला जाता। जब स्कूल में 'दोस्ती मेला' लगने वाला था, तो सुमन मैम ने क्लास के सभी बच्चों को स्कूल का बड़ा वाला हॉल सजाने के लिए ढेर सारे कागज़ के हवाई जहाज़ बनाने को कहा। इन जहाज़ों से एक 'विमानों की परेड' भी होनी थी। सबने कोशिश की, पर किसी का भी जहाज़ ठीक से नहीं बन रहा था। मिलो ने देखा कि उसके दोस्त परेशान हो रहे हैं। पहले तो उसने सोचा कि वह अपना राज़ किसी को नहीं बताएगा और अकेले ही सबसे अच्छा जहाज़ बनाने का इनाम जीतेगा। लेकिन फिर उसने टीना का उदास चेहरा और आरव के हाथ में मुड़ा-तुड़ा कागज़ देखा। मिलो ने एक गहरी साँस ली और सबको एक-एक करके जहाज़ मोड़ने का सही तरीका सिखाने का फैसला किया। उसने सबको जहाज़ की नोक को सीधा और पंखों को मज़बूत बनाने की तरकीब बताई, और देखते ही देखते पूरा कमरा बच्चों की हँसी और सफल कोशिशों से गूँज उठा। आखिर में, स्कूल का हॉल रंग-बिरंगे जहाज़ों से भर गया जो एक साथ उड़ रहे थे, और मिलो को समझ आया कि अकेले जीतने से ज़्यादा खुशी दूसरों की मदद करने में मिलती है।
Themes
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