दो गर्मियाँ, एक अनमोल ख्वाब
नक्शे, बदलाव और अंदर की हिम्मत की एक दिल छू लेने वाली कहानी।
About This Book
तेरह साल की लीना हमेशा से शहर को रोशनी, भीड़ भरी सड़कों और बेशुमार प्रेरणा की जगह मानती आई है। उसका चचेरा भाई मार्को उसके छोटे से शहर को शांत दोपहरों और जाने-पहचाने चेहरों की दुनिया समझता है। तो इस गर्मी में दोनों अपनी जगह बदल लेते हैं — लीना शहर की कला कार्यशाला में, जहाँ हर दूसरा छात्र उससे कहीं ज़्यादा ज़ोर से रंग भरता लगता है; मार्को बाग-बगीचों में, जहाँ इंटरनेट रेंगता है और दिन धीमे चलने को कहते हैं। वे एक मुड़ा हुआ नक्शा और नारंगी डोरी में बंधी एक चाबी अदला-बदली करते हैं, और हर कोई उम्मीदों की एक सूची लेकर पहुँचता है जिससे असली जगह मेल नहीं खाती। फिर बाग-बगीचों का प्यारा उत्सव हाथों की कमी से डूबने लगता है, ठीक उसी सप्ताहांत जब शहर लीना को अपनी एक प्रदर्शनी का मौका देता है।
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