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बड़े बीवर डैम की मरम्मत

दोस्तों के साथ नदी किनारे का सुधार

बड़े बीवर डैम की मरम्मत

बड़े बीवर डैम की मरम्मत

छप-छप वाली समस्या

बेनी बीवर ने एक डैम (बाँध) बनाया-फिर उसे एक छप-छप वाली समस्या सुनाई दी।

वह धूप से खिले नदी के किनारे खड़ा था, उसके पंजे कीचड़ से सने थे और वह गर्व से भर रहा था। लकड़ियाँ सलीके से रखी थीं। मिट्टी को कसकर दबाया गया था। डैम के पीछे के पानी ने एक चमकदार तालाब का रूप ले लिया था। बेनी मुस्कुराया और उसने अपने गाल फुलाए।

"मैंने कर दिखाया!" उसने फुसफुसाते सरकंडों से कहा। उसने कल्पना की कि मछलियाँ अपनी पूंछ बजाकर ताली बजा रही हैं। उसने सोचा कि मेंढक छोटी-छोटी टोपियाँ उछाल रहे हैं। उसने अपनी चपटी पूंछ पानी पर जोर से मारी। छपाक!

तभी उसे पानी टपकने की आवाज़ सुनाई दी। टपकता पानी अब बहने लगा। वह बहाव एक बड़े, चमकदार गड्ढे में बदल गया। वह एक धीमे, चालाक सांप की तरह किनारे पर रेंगने लगा।

"अरे! मेरे पैर की उंगलियाँ!" एक पतली आवाज़ आई।

रिया खरगोश ढलान पर बने एक बिल से बाहर निकली। उसकी मूंछें लटकी हुई थीं। उसके कान झुके हुए थे। उसके पंजों से पानी टपक रहा था।

"मेरा घर गीला हो गया है!" उसने कहा। "मेरा बिस्तर भी भीग गया है!"

बेनी की पूंछ भी झुक गई। उसके कान नीचे हो गए। वह नहीं चाहता था कि ऐसा हो। उसकी छाती में एक अजीब सी घबराहट होने लगी, जैसे रस्सी में गांठ लग गई हो।

"मुझे माफ़ कर दो," बेनी ने तुरंत कहा। "मुझे नहीं पता था। मैं कैसे मदद कर सकता हूँ?"

रिया ने अपना पैर पटका। कीचड़ उसके बालों पर उछला। उसने फैलते हुए पानी को देखा। उसने बेनी के कीचड़ से सने पंजों और चिंतित आँखों को देखा। उसके कान थोड़े से ऊपर उठे।

"तुम्हें सच में नहीं पता था," उसने नरमी से कहा। "ठीक है। चलो इसे ठीक करते हैं।"

दोस्तों वाला सुधार

वे दोनों जासूस दोस्तों की तरह एक साथ खड़े हो गए। सूरज की रोशनी पानी पर चमक रही थी। विलो पेड़ से चिड़ियाँ गा रही थीं। लकड़ी के लट्ठे पर बैठा एक कछुआ अपनी आँखें झपकाते हुए उन्हें देख रहा था।

बेनी ने एक लकड़ी से कीचड़ को कुरेदा। "चलो देखते हैं कि पानी कैसे बहता है," उसने कहा।

रिया ने अपने एक पंजे से मिट्टी पर टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें बनाईं। "मेरा बिल यहाँ है, इस ढलान पर," उसने कहा। "पानी तेज़ी से नीचे गिरता है।"

उन्होंने सबसे पहले एक छोटी सी नाली बनाने की कोशिश की, ताकि पानी दूर चला जाए। बेनी ने मिट्टी निकाली। रिया ने उसके किनारों को थपथपा कर चिकना किया।

पानी तेज़ी से नाली में गया, और फिर वापस छलक गया। उसमें से बुलबुले उठे और एक हँसते हुए मेंढक जैसी आवाज़ आई।

"यह काम नहीं आया," पानी के छींटों से पीछे कूदते हुए रिया ने कहा।

फिर उन्होंने मिट्टी का एक छोटा सा टीला बनाया, जैसे एक छोटी सी दीवार। बेनी ने अपने पंजों से मिट्टी को कसा। रिया ने अपने मजबूत पिछले पैरों से उसे मजबूती से दबाया।

टीला धंस गया। यह हिला, और फिर एक धीमी, चॉकलेटी फिसलन की तरह बह गया।

बेनी ने आह भरी और एक पत्थर पर बैठ गया। रिया भी उसके पास बैठ गई। वे दोनों हल्के गीले थे और उन पर कीचड़ के छींटे पड़े थे।

"नाश्ता?" रिया ने पूछा। उसने अपनी छोटी सी टोकरी से कुरकुरे गाजर बांटे। बेनी ने वो टहनियाँ कुतरीं जो उसने अपने कान के पीछे रखी थीं।

वे चबाते रहे और पानी को देखते रहे। टिप। टिप। पानी रेंग रहा था। एक ड्रैगनफ्लाई नीली चिंगारी की तरह तेज़ी से गुज़री।

"मेरी माँ कहती हैं, 'पानी हमेशा अपना रास्ता खोज लेता है,'" बेनी ने अपनी लकड़ी थपथपाते हुए कहा।

"मेरे बगीचे को शांत पानी पसंद है," रिया ने कहा। "बाढ़ नहीं।"

बेनी की आँखों में चमक आ गई। "क्या होगा अगर हम पानी को उसका अपना रास्ता दे दें?"

"और उसे धीमा और प्यारा बना दें," रिया ने आगे कहा।

उन्होंने कंकड़ और पत्तों से एक योजना बनाई। बेनी ने डैम के ऊपर तीन कंकड़ रखे। "यहाँ से पानी बाहर निकलने का रास्ता (स्पिलवे)," उसने कहा। "बस एक छोटी सी जगह। अतिरिक्त पानी धीरे-धीरे बाहर निकल सकता है।"

रिया ने अपने बनाए बिल के चारों ओर पत्तों की एक घुमावदार लाइन बनाई। "यहाँ एक टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता," उसने कहा। "यह आस-पास से जाता है, अंदर से नहीं।" उसने एक और छोटा घुमाव जोड़ा। "और यह छोटा रास्ता बगीचे को पानी दे सकता है।"

"चलो बनाते हैं," बेनी ने उछलते हुए कहा।

उन्होंने एक साथ काम किया। मिट्टी निकालना। दबाना। चिकना करना। और फिर टेस्ट करना।

बेनी ने डैम में अपनी पूंछ के बराबर एक साफ़ जगह बनाई। उसने किनारों को अच्छे से दबाया ताकि वे टूटे नहीं। रिया ने अपने पिछले पैरों से पानी के रास्तों को आकार दिया, फिर उन्हें नरम मिट्टी की तरह थपथपा कर चिकना कर दिया।

पानी उस रास्ते (स्पिलवे) से एक चमकदार रिबन की तरह फिसलने लगा। यह कंकड़ों के ऊपर से फुसफुसाता हुआ बहा। यह एक शांत साँप की तरह उनके बनाए रास्ते के साथ-साथ मुड़ने लगा।

रिया उस रास्ते के साथ उछल-कूद करने लगी। "कृपया इस तरफ से जाएँ," उसने हँसते हुए पानी से कहा।

वह रिबन (पानी) उसके बिल के पास से बहा और आगे बढ़ता गया। इसने ढलान का चक्कर लगाया और बगीचे में जा पहुँचा। वहाँ की मिट्टी बिल्कुल सही तरीके से गीली हो गई। कोई गड्ढे नहीं। दरवाज़े पर कोई छींटे नहीं।

"यह काम कर रहा है!" बेनी चिल्लाया। उसने अपनी पूँछ पटकी, लेकिन इस बार किनारे से दूर। छपाक!

उन्होंने उस गीले, मुलायम बगीचे में गाजर के ऊपरी हिस्से और क्लोवर के बीज बोए। रिया ने हर जगह को छोटे तकिए की तरह थपथपाया। बेनी ने बगीचे के चारों ओर पत्थरों का एक घेरा बना दिया।

सूर्यास्त तक, मेंढक खुशी से टर्राने लगे। डैम के पीछे शांत तालाब में मछलियाँ चमक रही थीं। हवा में गीली मिट्टी और मीठे क्लोवर की महक आ रही थी।

रिया ने अपने बिल में झाँका। यह आरामदायक और सूखा था। उसकी मूंछें फिर से तन गई थीं। वह इतनी चौड़ी मुस्कान के साथ मुस्कुराई कि उसकी नाक हिलने लगी।

"धन्यवाद," उसने कहा। "तुमने मेरे साथ मिलकर इसे ठीक किया।"

बेनी ने उस चिकने रास्ते और घुमावदार नालियों को देखा। उसे अपनी छाती में हल्कापन और खुशी महसूस हुई।

"चलो इसका नाम रखते हैं," उसने कहा। "द फ्रेंडली फ्लो डैम (दोस्तों वाला प्यारा डैम)।"

रिया ने सिर हिलाया। "बिल्कुल सही।"

वे किनारे पर खड़े होकर उस चाँदी जैसे पानी को बहते हुए देखने लगे। एक बगुला उनके ऊपर से उड़ता हुआ गया। शाम के पहले तारे टिमटिमाने लगे थे।

"हम हर हफ़्ते इसकी जाँच करेंगे," बेनी ने कहा। "हम नाश्ता भी ला सकते हैं।"

"और नए बीज भी," रिया ने कहा। "हमारा बगीचा बड़ा होगा।"

बेनी मुस्कुराया। उसे चीज़ें बनाना पसंद था। उसे सीखना पसंद था। उसे एक दोस्त के साथ मिलकर चीज़ें ठीक करना बहुत पसंद था।

नदी शांति और प्यार से, अपना नया और अच्छा रास्ता खोजते हुए, फुसफुसाती हुई बह रही थी।

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