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स्टेज-फ्राइट स्टार और एक प्यारी मुस्कान

एक छोटा सा स्टिकर, एक चमकीला सूरजमुखी, और एक बहादुरी भरा गाना

स्टेज-फ्राइट स्टार और एक प्यारी मुस्कान

पर्दा उठते ही मीना के घुटने कांपने लगे।

उसने अपनी छोटी युकुलेले को कसकर पकड़ रखा था। इसके तार ठंडे लग रहे थे। उसकी हथेलियां गर्म और पसीने से चिपचिपी थीं। लाल पर्दा उसके जूतों को एक कानाफूसी की तरह छूकर निकला।

बैकस्टेज की घबराहट

दो दिन पहले, मीना बहुत खुश थी। वह उछलती-कूदती जिम में आई। फर्श एक बड़ी पीली झील की तरह चमक रहा था। उसने एक शांत कोने में अपने गाने का अभ्यास किया। उसका पैर ताल दे रहा था। उसकी चोटी उछल रही थी।

फिर रिहर्सल का समय आया। बत्तियां झिलमिलाईं। वे मधुमक्खियों की तरह भिनभिना रही थीं। मीना माइक के पास गई। पहला सुर बहुत पतला और तीखा निकला। उसका गला रुंध गया। उसकी उंगलियां सुन्न पड़ गईं।

"मुझसे नहीं होगा," उसने घबराकर कहा और मंच से भाग गई। उसके स्नीकर्स की लकड़ी के फर्श पर धप-धप आवाज़ हुई। वह कुर्सियों के पीछे छिप गई। उसका दिल तेजी से और बेकाबू होकर धड़क रहा था।

घर पर, दादी उससे मिलने आईं। उनमें से इलायची की चाय जैसी महक आ रही थी। उन्होंने मीना को एक लंबी, प्यार भरी झप्पी दी।

"बड़ा मंच है, है ना?" दादी ने मीना का हाथ थपथपाते हुए कहा।

"वह बहुत बड़ा है," मीना ने दादी के स्कार्फ में मुंह छिपाते हुए कहा। "मेरा सुर खराब हो गया। मेरे घुटने कांप रहे थे। मुझे नहीं लगता कि मैं बहादुर बन सकती हूं।"

दादी ने धीरे से और शांति से सिर हिलाया। "हम एक योजना बना सकते हैं," उन्होंने कहा। "सबसे पहले, हम सांस लेंगे। चार तक गिनते हुए अंदर, चार तक गिनते हुए बाहर। लहरों की तरह।"

वे आमने-सामने बैठीं। उन्होंने एक साथ सांस ली। चार तक अंदर। चार तक बाहर। मीना के कंधे ढीले पड़ गए। उसे हल्का महसूस होने लगा।

"अब," दादी ने अपने बैग में कुछ ढूंढ़ते हुए कहा, "किसी एक जाने-पहचाने चेहरे को चुनो। बस एक। और उस चेहरे को देखकर गाओ।" उन्होंने अपने स्कार्फ पर एक चमकीला सूरजमुखी का पिन लगा लिया। उसकी पंखुड़ियां थोड़ी चमक रही थीं।

दादी ने एक गोल स्टिकर पर एक छोटा सा मुस्कुराता हुआ चेहरा भी बनाया। "एक सीक्रेट दोस्त," उन्होंने कहा।

मीना ने वह स्टिकर अपनी युकुलेले पर साउंड होल के पास चिपका दिया। वह छोटी सी मुस्कान उसे देख रही थी। इसे देखकर मीना को हंसी आ गई।

एक प्यारी सी चमक

टैलेंट शो की रात आ गई। जिम में मधुमक्खियों के छत्ते जैसी चहल-पहल थी। दीवारों पर पोस्टर लहरा रहे थे। कुर्सियां खिसकाई जा रही थीं। हवा में पॉपकॉर्न और मार्कर की महक थी।

बैकस्टेज, मीना ने अपनी ट्यूनिंग चेक की। ट्वांग, ट्वांग। उसकी उंगलियां कांप रही थीं। उसने उन्हें अपनी जींस पर पोंछा।

उसका क्लासमेट, जय, उसके बगल में उछल रहा था। उसने एक मज़ेदार डांस के लिए सिल्वर स्केट्स पहने थे। "तुम यह कर सकती हो, मीना," उसने कहा। उसने मुट्ठी आगे बढ़ाई।

मीना ने अपनी मुट्ठी उससे टकरवाई, लेकिन बहुत धीरे से।

"अपनी दादी की तरकीब याद रखना," जय ने कहा। "चार तक सांस अंदर। चार तक बाहर। किसी एक चेहरे को ढूंढना।"

मीना ने सिर हिलाया। उसने स्टिकर वाली मुस्कान पर अपना अंगूठा रखा। वह छोटा चेहरा उसे आंख मारता हुआ लगा। उसकी सांसें थोड़ी सामान्य हुईं। उसने मन ही मन गिना। एक, दो, तीन, चार। बाहर। एक, दो, तीन, चार।

स्टेज मैनेजर ने फुसफुसाकर कहा, "अगला नंबर तुम्हारा है।" वह फुसफुसाहट भी बहुत तेज़ लग रही थी। मीना के पेट में हलचल होने लगी। उसने पर्दे के पीछे से झांका। जिम बहुत बड़ा लग रहा था। वहां बहुत सारे लोग थे। बहुत सारी आंखें थीं।

वह फिर से भाग जाना चाहती थी। उसके जूतों के अंदर उसकी उंगलियां मुड़ गईं।

तभी पर्दा उठा। स्पॉटलाइट उस पर पड़ी। यह उसके गालों पर तेज़ और गर्म थी। बाकी का कमरा एक धुंधले अंधेरे में बदल गया।

मीना ने पलकें झपकाईं। वह हर चेहरा नहीं देख सकती थी। वह लाइनें भी नहीं देख पा रही थी। रोशनी ने उसकी आँखों में छोटे-छोटे तारे बना दिए थे।

और वहीं-बिल्कुल सामने-एक छोटी, सुनहरी चमक थी। सूरजमुखी का पिन सोने की एक बूंद की तरह चमक रहा था। दादी का स्कार्फ! मीना दादी का पूरा चेहरा नहीं देख पा रही थी। लेकिन वह पिन लगातार और तेज़ी से चमक रहा था।

मीना ने चार तक गिनकर सांस अंदर ली। चार तक बाहर छोड़ी। उसके कंधे नीचे हो गए। उसकी पकड़ ढीली हो गई।

उसने अपनी युकुलेले पर लगे स्टिकर वाली मुस्कान को देखा। "हे दोस्त," उसने फुसफुसाते हुए कहा। माइक ने उस आवाज़ को नहीं पकड़ा। यह सिर्फ उसे और स्टिकर को पता था।

उसका पहला कॉर्ड लड़खड़ाया, जैसे कोई साइकिल चलना शुरू कर रही हो। वह लगभग रुक गई थी। लेकिन इसके बजाय, उसने अपनी आँखें उस सूरजमुखी पर टिका दीं। उसने रोशनी के पीछे दादी की प्यारी आँखों की कल्पना की। उसने चाय की भाप और झप्पियों के बारे में सोचा।

स्ट्र्रम। अगला कॉर्ड बेहतर लगा। स्ट्र्रम, स्ट्र्रम। उसकी उंगलियों को रास्ता याद आ गया। उसके पैर को ताल मिल गई। टैप, टैप, टैप।

मीना ने गाना शुरू किया। उसकी आवाज़ धीमी थी लेकिन सच्ची थी। हर लाइन के साथ यह बढ़ती गई। ऐसा लग रहा था कि पूरा जिम उसके साथ सांस ले रहा है। कुछ लोगों ने प्यार से ताली बजाई। जय ने एक बार हूटिंग की, फिर अपना मुंह ढक लिया।

मीना मुस्कुराई, एक सच्ची, बड़ी मुस्कान। उसने अपना गाना सीधे सूरजमुखी को सुनाया। उस छोटे से स्टिकर ने भी उसे देखकर मुस्कान दी।

आखिरी सुर रोशनी में गूंजता रहा। यह एक पंख की तरह तैर रहा था। मीना ने इसे जाने दिया। फिर वह आवाज़ खुशी से भरी तालियों और जयकारों में बदल गई।

उसने झुककर धन्यवाद किया और लगभग हंस पड़ी। उसके पैर अब हल्के लग रहे थे, कांप नहीं रहे थे। बैकस्टेज, जय ने उसे इतनी ज़ोर से हाई-फाइव दिया कि उसे झनझनाहट हुई।

"तुमने कर दिखाया!" उसने कहा। "स्टार पावर!"

सीढ़ियों के पास दादी उससे मिलीं। उन्होंने मीना को एक ऐसी झप्पी दी जिसमें चाय और ताज़ी हवा की महक थी। "तुमने मुझे ढूंढ लिया," दादी ने फुसफुसाते हुए कहा।

"मैंने आपका पिन ढूंढ लिया," मीना ने कहा। "और मेरी सांस। और मेरा स्टिकर दोस्त।"

वे एक साथ चहल-पहल और चमक के बीच से गुज़रे। जिम अब बहुत बड़ा नहीं लग रहा था। यह एक ऐसी जगह लग रही थी जहां गाने ज़िंदा रह सकते थे।

अगली सुबह, मीना ने वह छोटी सी मुस्कान अपनी नोटबुक पर चिपका दी। उसने सावधानी से किनारों को दबाया। उसने सूरजमुखी के पिन को अपने बैकपैक की जेब में सुरक्षित रख लिया।

स्कूल में, दीवार पर एक पर्चा लहरा रहा था: अगले हफ्ते स्पेलिंग बी प्रतियोगिता! मीना का दिल थोड़ा सा उछला। उसने अपनी नोटबुक पर लगे स्टिकर को छुआ। उसने चार तक सांस अंदर ली। चार तक बाहर छोड़ी। उसके कदम स्थिर हो गए।

जय दौड़ता हुआ आया। "क्या तुम नाम लिखा रही हो?" उसने पूछा।

मीना ने अपने स्टिकर दोस्त को देखा। उसने एक चमकीले, सुनहरे पिन की कल्पना की। उसने महसूस किया कि उसके पैर ज़मीन पर मजबूती से जमे हुए हैं।

"हां," उसने मुस्कुराते हुए कहा। "एक बार में एक शब्द।"

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