रूबी रैबिट ने चखे नए स्वाद
एक छोटा सा स्वाद बन गया एक बड़ा रोमांच
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पूल के किनारे लीला के पैर रुक गए, जहाँ पानी उसे किसी महासागर जितना विशाल लग रहा था। उसका तौलिया उसके कंधों पर किसी लाल केप (चोगा) की तरह लटक रहा था। बच्चे पानी में छप-छप कर रहे थे और खुशी से चिल्ला रहे थे। लीला ने अपने केप को कसकर पकड़ लिया और अपनी जगह से बिल्कुल नहीं हिली।
कोच रिवेरा उसके पास घुटनों के बल बैठ गए। उनकी आवाज़ बहुत शांत और स्थिर थी। "यह नीला रंग देख रही हो?" उन्होंने पानी की लहरों की ओर इशारा करते हुए कहा। "यह 'ब्लू बिग ब्रेव' (विशाल नीला साहस) है। इसे छोटे-छोटे कदम बहुत पसंद हैं।"
आयशा ने कम गहरे पानी की तरफ से हाथ हिलाया। "आओ हमारे साथ छप-छप करो!" उसने पुकारा। मार्को और जमाल ने अजीब-अजीब मुँह बनाए। उनके गालों पर पानी की बूँदें नन्हें तारों की तरह चमक रही थीं।
लीला की उंगलियों ने तौलिए को और कस लिया। उसके घुटने प्लेट में रखी जेली की तरह काँप रहे थे। "मैं आना चाहती हूँ," उसने धीरे से कहा। "लेकिन पानी बहुत बड़ा लग रहा है।"
"हम छोटी शुरुआत करेंगे," कोच रिवेरा ने कहा। "मेरे साथ किनारे पर बैठ जाओ। हम अपने पैरों से पानी में दस छोटी छप-छप गिनेंगे। तैयार हो?"
वे बैठ गए। उनकी एड़ियों ने पानी को छुआ। लीला ने एक गहरी साँस ली और शुरू किया। "एक, दो, तीन," उन्होंने गिना, उनके पैर छोटी मछलियों की तरह चल रहे थे। पानी की ठंडी बूँदें लीला के पैरों पर गिरीं। दस तक पहुँचते-पहुँचते, उसका डर थोड़ा कम हुआ।
अगले दिन, सूरज की गर्मी से पूल का किनारा गर्म हो गया था। कोच ने पहली सीढ़ी पर एक छोटी बाल्टी रखी। "ड्रैगन पफ्स," उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। "बुलबुले ड्रैगन्स को दोस्त बना देते हैं।"
लीला बाल्टी के करीब झुकी। क्लोरीन की वजह से उसकी नाक में गुदगुदी हुई। उसने अपने गाल फुलाए और हवा फूँकी। मुलायम बुलबुले उठे और नन्हें ड्रम की तरह फूटने लगे। हर बुलबुले के फूटने पर पूरी क्लास ने ताली बजाई।
आयशा ने झुककर एक धुन गुनगुनाई। "इस तरह गुनगुनाओ," उसने कहा। "इससे बुलबुले आराम से निकलते हैं।" लीला ने कोशिश की। हम्मम्मम्म्। गोल-गोल बुलबुले एक सीधी लाइन में ऊपर उठे।
मार्को ने बाल्टी के किनारे को थपथपाया। "मैं कछुए की तरह धीरे गिनता हूँ," उसने कहा। "एक... दो... तीन।" लीला ने उसकी गिनती के साथ, धीरे और पूरे विश्वास से किया। जमाल उसके बगल वाली सीढ़ी पर खड़ा था। "मैं यहीं हूँ," उसने कहा। उनके कंधे आपस में छू रहे थे।
बुधवार को, कोच ने एक बोर्ड उठाया। उस पर टेढ़े-मेढ़े अक्षर और एक तारा बना था। "टास्क का समय! स्टारफिश फ्लोट!" उन्होंने घोषणा की। "हाथ फैलाओ, पैर फैलाओ, और पेट ऊपर।"
पानी से छप-छप की आवाज़ें आ रही थीं। लीला के पेट में अजीब सी हलचल हुई। उसने पीछे लेटने की कोशिश की लेकिन जल्दी से उठकर बैठ गई। उसकी साँसें छोटी हो गईं, जैसे छोटी हिचकियाँ हों।
कोच ने पानी की सतह पर एक पत्ता रखा। वह थोड़ा हिला, फिर नीले पानी पर वह चमकदार हरा पत्ता आराम से तैरने लगा। "पानी इस पत्ते को सँभाले हुए है," उन्होंने धीरे से कहा। "यह तुम्हें भी सँभाल सकता है।"
लीला पत्ते को बहते हुए देखती रही। उसके मन का डर थोड़ा कम हुआ। उसने अपने कान पानी के करीब किए। पानी की ठंडक उसकी गर्दन तक पहुँच गई। वह एक साँस तक रुकी, फिर दूसरी साँस तक, और फिर बाहर आ गई। आयशा ने ताली बजाई। कोच ने अंगूठा दिखाया। लीला मुस्कुराई, उसके गीले बाल उसके गालों पर चिपके हुए थे।
ब्रेक के बाद, उन्होंने एलिगेटर वॉक (मगरमच्छ की चाल) की। "हाथ दीवार पर, पैर ज़मीन पर," कोच ने कहा। "चॉम्प, चॉम्प, धीरे और मजबूती से।" वे किनारे के साथ-साथ चले, उंगलियों से खुरदरी टाइल्स को कसकर पकड़ा। लीला के पैरों ने पानी को ऐसे धकेला जैसे वह सूप हो। उसे इस मज़बूत चाल का अहसास बहुत अच्छा लगा।
गुरुवार का दिन 'ट्रेजर स्कूप' (खज़ाना ढूँढने) का था। रंग-बिरंगे रिंग्स पानी में उतनी दूर डूबे थे जहाँ तक हाथ पहुँच सके। पानी ने लीला की कलाइयों को ठंडा कर दिया। उसने हाथ बढ़ाया, थोड़ा हिली, और एक जामुनी रिंग पकड़ लिया। वह आसानी से उसकी हथेली में आ गया। जमाल खुशी से चिल्लाया और उसने अपने पैरों से ड्रमस्टिक की तरह पानी में छप-छप की। लीला हँसी और उसने एक लाल रिंग पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया।
फिर से कान पानी में डालने का समय आ गया। लीला एकदम सुन्न पड़ गई। टप-टप की आवाज़ के अलावा पूरी दुनिया शांत हो गई थी। उसकी साँस जूते की गाँठ की तरह कस गई।
कोच सीढ़ी पर बैठ गए ताकि उनकी आँखें लीला की आँखों के सामने हों। उन्होंने अपनी जेब से एक छोटा, रंग उड़ा हुआ रिबन निकाला। उस पर क्रेयॉन से "मैंने कर दिखाया" लिखा था। "किसी ने मुझे यह दिया था," उन्होंने प्यार से कहा। "मैं छोटा था, और पानी मुझे बहुत बड़ा लगता था। मेरा दिल एक मार्चिंग बैंड की तरह ज़ोर-ज़ोर से धड़कता था। छोटे-छोटे कदमों ने मेरी मदद की। छोटे कदमों से बहुत मदद मिलती है।"
लीला ने रिबन के मुलायम किनारे को छुआ। वह पुराने कागज़ और धूप की तरह लग रहा था। उसने लेन रोप के पास तैरते हुए पत्ते को देखा। उसकी घबराहहट कम हुई। उसने पहले एक कान पानी में डाला, फिर दूसरा। ठंडी शांति उसकी दुनिया में भर गई। उसने अपने बुलबुलों को मधुमक्खियों की तरह हम्मम्मम्म् गाते हुए सुना।
शुक्रवार का दिन साफ आसमान और हँसी-मज़ाक के साथ आया। दीवार से सिर्फ दो छोटे कदम की दूरी पर पानी पर तैरने वाला एक मैट रखा था। "आइलैंड का पुल!" कोच ने पुकारा। "बस दो कदम, और फिर एक मुस्कान।"
लीला का दिल उसकी पसलियों में ज़ोर से धड़कने लगा। उसके पैरों की उंगलियों ने किनारे को कस लिया। उसे ड्रैगन पफ्स और कछुए वाली गिनती याद आई। उसे वह पत्ता और रिबन याद आया।
कोच ने दोनों हाथ आगे बढ़ाए। "मैंने तुम्हें पकड़ा हुआ है," उन्होंने कहा। "तुम बस कदम बढ़ाओ।" आयशा, मार्को और जमाल पास ही खड़े थे। वे दोस्ताना पेड़ों की तरह झूम रहे थे।
"एक कदम," लीला ने कहा। उसका पैर पानी में गया, और फिर मैट पर। मैट हिला। उसके घुटने स्प्रिंग की तरह मुड़ गए। "दो कदम," उसने कहा। वह आराम से मैट पर पहुँच गई। वह हिला, लेकिन पलटा नहीं। पानी ने उसे सँभाल लिया था। उसके मुँह से एक प्यारी और खुशमिज़ाज हँसी छलक पड़ी।
पूल के चारों ओर खुशी की आवाज़ें गूँज उठीं। लीला का तौलिया-केप बेंच पर टंगा था, जिसे वह अब भूल चुकी थी। उसने अपने हाथ फैलाए। "स्टारफिश टाइम!" उसने पुकारा। वह धीरे से पीछे लेटी, उसके कान गीले थे, और चेहरा धूप से गर्म था। एक साँस। दो साँस। पूरी तीन साँसें। वह उस पत्ते की तरह शांत तैर रही थी।
जब वह खड़ी हुई, तो पानी उसके गालों से नीचे बह रहा था। उसके होंठों पर इसका स्वाद थोड़ा नमकीन था। उसके दोस्तों ने तालियाँ बजाईं और बारिश की तरह पानी को थपथपाया। कोच की आँखें चमक उठीं। उन्होंने वह पुराना रिबन उसकी हथेली में रख दिया। "आज के लिए इसे उधार ले लो," उन्होंने कहा। "किसी दिन तुम अपना खुद का रिबन हासिल करोगी।"
लीला गीले बालों और एक बड़ी सी मुस्कान के साथ बाहर निकली। उसकी चप्पलें गर्म फर्श पर चू-चू की आवाज़ कर रही थीं। उसने पीछे मुड़कर शांत, नीले पानी को देखा। अब वह उसे महासागर जितना बड़ा नहीं लग रहा था। उसने अपने तौलिया-केप से धीरे से कहा। "कल की बहादुरी एक छोटे कदम से शुरू होती है।" और उसके कदम अब इसके लिए बिल्कुल तैयार थे।