लैला और अनलेबल्ड एडवेंचर
एक सिटी क्वेस्ट जहाँ हर हिस्से की अहमियत है
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फिनले लोमड़ी हमेशा हर लाइन में सबसे आगे खड़ा रहता, गाल फुलाकर और अपना पंजा थपथपाता। वह एक जगह से दूसरी जगह जाते हुए एक छोटे नारंगी धुंधले धब्बे जैसा दिखता, इस उम्मीद में कि वह किसी और से पहले वहाँ पहुँच सके।
आज, जंगल के गाँव पर सूरज चमक रहा था। स्कूल में, फिनले दरवाज़े की तरफ लपका, अपनी नाक आगे बढ़ाकर ताकि वह अंदर जाने वाला पहला हो। जब खेल के मैदान में जाने का समय हुआ, तो वह सबके पास से तेज़ी से निकल गया, उसकी पूँछ उसके पीछे एक रोएँदार झंडे की तरह लहरा रही थी।
दूसरे जानवर बड़ी-बड़ी आँखों से फिनले को देख रहे थे। टिमी खरगोश ने अपनी नाक सिकोड़ी और जब फिनले तेज़ी से उसके पास से गुज़रा तो वह पीछे हट गया। तारा कछुआ सावधान थी, लेकिन फिनले फिर भी उसके कवच से सटकर निकल गया।
नाश्ते के समय, उनकी कोमल शिक्षिका मिस मेपल ने कहा, 'फिनले, दूसरों को भी मौका देना याद रखना।' फिनले ने इंतज़ार करने की कोशिश की, लेकिन उसके पंजों में झुनझुनी हो रही थी और उसकी मूंछें फड़क रही थीं। सबसे पहले होना ही उसे सही लगता था।
एक धूप वाले शनिवार को, पूरा जंगली गाँव 'घास के मैदान के मेले' के लिए इकट्ठा हुआ। वहाँ खेल थे, गुब्बारे थे, और अब तक की सबसे बड़ी, सबसे घुमावदार फिसलपट्टी थी। जानवर लाइन में लगे हुए थे, इंतज़ार करते हुए बातें कर रहे थे। फिनले तेज़ी से आगे बढ़ा, और सबसे आगे घुस गया।
अचानक, भीड़ के ऊपर से एक धीमी सी रोने की आवाज़ आई। वह मुड़ा और उसने छोटी हेज़ल गिलहरी को देखा, जो बहुत छोटी लग रही थी। वह अपनी आँखें मल रही थी। 'मैं इंतज़ार करती रहती हूँ, लेकिन मैं हमेशा पीछे रह जाती हूँ,' वह सिसक कर बोली।
फिनले के पेट में हल्की सी ऐंठन हुई। उसने हेज़ल को देखा, फिर टिमी खरगोश और तारा कछुआ पर नज़र डाली। वे भी खुश नहीं दिख रहे थे।
मिस मेपल फिनले के पास घुटनों के बल बैठ गईं। 'आज हम 'चलो बहने दो लाइन' क्यों न आज़माएँ?' उन्होंने मुस्कुराते हुए सुझाव दिया। 'इस बार, हर जानवर के पीछे एक सहायक होगा जो उसकी बारी आने पर उसका उत्साह बढ़ाएगा!'
फिनले के कान खड़े हो गए। उसे उत्साह बढ़ाना पसंद था - लेकिन किसी और को पहले जाने देना? यह नया था।
मिस मेपल ने अपने पंजे से ताली बजाई। 'चलो शुरू करें!' उन्होंने लाइन की ओर इशारा किया। फिनले, टिमी खरगोश के पीछे खड़ा हुआ। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। लेकिन उसे मिस मेपल कीอบอุ่น आँखें याद आईं और उसने अपने पंजे एक साथ भींच लिए।
फिसलपट्टी के लिए अगली बारी टिमी की थी। फिनले ने एक गहरी साँस ली और चिल्लाया, 'जाओ, टिमी, जाओ!' टिमी मुस्कुराया और फिसलपट्टी से नीचे सरक गया, उसके कान खुशी से फड़फड़ा रहे थे।
फिर हेज़ल की बारी थी। उसने पीछे मुड़कर फिनले को देखा। उसने अपने पंजे से उसे एक बड़ा थम्स-अप दिया। हेज़ल की आँखें चमक उठीं जब वह खिलखिलाते हुए नीचे फिसली।
फिनले ने अपने सीने में एक छोटी, गर्म सूरज की किरण को बढ़ते हुए महसूस किया। उत्साह बढ़ाना मज़ेदार था! उसने देखा कि जब वह ताली बजाता और धैर्य से इंतज़ार करता तो हर कोई कितना खुश दिखता था।
जब अंत में फिसलने की उसकी अपनी बारी आई, तो उसने देखा कि उसके सभी दोस्त उसके लिए उत्साह बढ़ा रहे थे। उनकी चीखें और हँसी ने उसे अंदर से हल्का महसूस कराया - जैसे कि वह तैर सकता हो!
उसके बाद, फिनले ने हर खेल के साथ 'चलो बहने दो लाइन' की कोशिश की। उसने तारा कछुआ को उछाल वाले महल के ऊपर तक पहुँचने में भी मदद की और हेज़ल को दिखाया कि डंक टैंक पर घंटी कैसे बजानी है।
जैसे ही मेला समाप्त हुआ, फिनले घास पर बैठा मुस्कुरा रहा था। घास का मैदान खुशगवार बातों से गूंज रहा था। इस बार, वह सिर्फ पहले आने की दौड़ में नहीं था - वह अपने दोस्तों के साथ नई, उज्ज्वल यादें बना रहा था।
फिनले ने धीरे से अपना पंजा थपथपाया, लेकिन इसलिए नहीं कि वह इंतज़ार नहीं कर सकता था। वह यह देखने के लिए उत्साहित था कि आगे क्या होगा, क्योंकि अब वह जानता था कि इंतज़ार करना सिर्फ पहले आने से कहीं ज़्यादा खुशी ला सकता है।
एक त्योहार, मिली हुई एक डायरी, और सूर्योदय का एक फैसला
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